
सोनभद्र। राजस्थान में मिले यूरेनियम के बाद अब उत्तर प्रदेश (यूपी) की सोन पहाड़ी (Son hill) पर 3 हजार टन सोने ( gold) का भंडार मिला है। इसकी पुष्टि तो हो ही चुकी है शनिवार को इसकी नीलामी की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। इसके लिए प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार (yogi government) ने 7 सदस्यों की टीम गठित कर दी है।
कैसे चला पता:
दरअसल वर्ष 2005 में यहां जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) की टीम ने जिले के खनिज तत्वों की स्टडी की थी। इसमें पता चला कि सोनभद्र जिले में सोना है। वर्ष 2012 में इसकी पुष्टि भी हो गई। इसके बाद प्रदेश सरकार ने तेजी दिखाते हुए अब इनके आवंटन के संबंध में प्रक्रिया तेज कर दी है।
कहां है ये सोना पहाड़ी :
सोना पहाड़ी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के कोन थाना क्षेत्र के हरदी गांव में व दुद्धी तहसील के महुली गांव के पास है। यहां के हरदी क्षेत्र में 646.15 किलोग्राम और सोन पहाड़ी में 2943.25 टन सोने का भंडार बताया जा रहा है।
7 सदस्यों की टीम करेगी जिओ टैगिंग:
ई टेंडरिंग के माध्यम से ब्लॉकों की नीलामी होगी। इसके लिए शासन ने 7 सदस्यों की टीम बना दी है। ये टीम पूरे क्षेत्र की जिओ टैगिंग करेगी। ये टीम अपनी रिपोर्ट 22 फरवरी यानि शनिवार को देगी। वह अपनी रिपोर्ट भू तत्व एवं खनिकर्म निदेशालय लखनऊ को देगी।
सोने के साथ मिला इनका भी भंडार
इसके साथ-साथ सोनभद्र के फुलवार क्षेत्र में दो स्थानों पर तथा सलैयाडीह क्षेत्र में एडालुसाइट , पटवध क्षेत्र में पोटाश, भरहरी में लौह अयस्क और छपिया ब्लाक में सिलीमैनाइट के भंडार की भी खोज की गई है।
अब यूरेनियम की तलाश शुरू
इतना ही नहीं जिले के खनिज अधिकारी केकेण राय ने बताया कि सोनभद्र जिले में यूरेनियम (uranium) का भी भंडार होने की संभावना है, जिसकी तलाश में केंद्रीय और अन्य टीम लगी हुई हैं। इससे पहले राजस्थान में यूरेनियम (uranium) का बड़ा भंडार मिल चुका है। ऐसे में अगर उत्तर प्रदेश में भी यूरेनियम का भंडार मिलता है तो नि:संदेह इससे न सिर्फ युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति में भी परिवर्तन आएगा।
जमीन के सर्वे का काम जारी
खनिज अधिकारी केके राय ने बताया कि भूतत्व और खनिकर्म विभाग और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (gsi) की टीम इस कार्य में लगी हुई हैं। जल्द ही पट्टा देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। अभी हेलीकाप्टर के माध्यम से हवाई सर्वे किया जा रहा है और इसका आकलन किया जा रहा है कि कितनी राजस्व की भूमि है और कितनी वन विभाग की हैं। इससे खनन के लिए वन विभाग (forest department) से अनुमति की प्रक्रिया शुरू हो सके। सरकार की कोशिश है कि इसके उत्खनन का कार्य जल्दी से जल्दी शुरू हो जाए।