
रायपुर- विजयदशमी यानी आज का दिन पूरे हिंदू धर्म के लिए बहुत बड़ा दिन है. इस दिन लोग बुराई का अंत करते हैं. असत्य पर सत्य की जीत होती है. सनातन धर्म में दशहरे का दिन बेहद खास माना जाता है. इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर और भगवान राम ने लंका के राजा रावण का वध किया था. इसलिए इस दिन को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है.
भारत में सभी त्यौहार बड़ी रीति-रिवाज और परंपराओं के साथ मनाया जाता है. उसी तरह दशहरे के दिन रावण का दहन किया जाता है.
आपको बता दें कि दशहरे के दिन रावण के दहन के साथ पान खाने की भी परंपरा है. कहा जाता है पान खाना मान-सम्मान का प्रतीक होता है. बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व का प्रतीक होता है. दशहरे के दिन शस्त्रों की भी पूजा की जाती है.
दशहरे के दिन पान खाने की परंपरा को लेकर कहा जाता है. पान खाने से घर में सुख शांति और संपन्नता आती है. साथ ही प्रेम दर्शाने के लिए भी पान खाया जाता है. इस दिन लोग असत्य पर सत्य की जीत की खुशी साझा करते हैं और प्रण लेते हैं कि वह अपने अंदर की भी बुराइयों का अंत करेंगे. जिस प्रकार रावण का अंत भी प्रभु श्रीराम ने कर दिया था.
हिंदू धर्म में पान के पत्ते का उपयोग पूजा-पाठ व कथा में भी शुभ कार्यों में होता है. नवरात्रि के त्यौहार में मां शक्ति को भी पान सुपारी का भोग लगाया जाता है. विजयादशमी को रावण के अंत के साथ भी पान खाया जाता है. इस प्रकार पान धार्मिक महत्व को भी दर्शाता है. पान खाना खाने से शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ती है सभी रोग भी दूर होते हैं.
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि पान एक परंपरागत धार्मिक मान्यता का हिस्सा है. नवरात्रि के 9 दिनों में भक्त माता की पूजा पाठ कर व्रत कर अपने सुख शांति और खुशहाली की कामना करते हैं तो वहीं विजयादशमी में रावण का अंत कर बुराइयों का भी नाश करते हैं और सत्य की राह पर चलने की कामना करते हैं.