छत्तीसगढ़ के इस गांव में है अजीब परम्परा, कुलदेवता को खुश करने के लिए एक दिन पहले मनाया जाता है होली, देखिये स्पेशल रिपोर्ट

इमाम हसन/सूरजपुर। त्योहारों की आस्था और परंपरा तो भारत की संस्कृति के हर पन्ने में देखने को मिलेगा। लेकिन सूरजपुर के ओड़गी ब्लाक के भाड़ी गांव में होली त्योहार को लेकर ग्रामीणों की ऐसी परंपरा जो वर्षो से चली आ रही है. जिसके कारण होली का त्योहार नियत तिथि में नहीं बल्की उससे एक दिन पहले मनाया जाता है. अब इस परंपरा को आस्था कहे या रिवाज। देखिये स्पेशल रिपोर्ट।
सूरजपुर के ओड़गी ब्लाक का भाड़ी गांव जो कि आदिवासी बाहुल्य है. लेकिन गांव मे पुर्वजो का चला आ रहा एक ऐसी परंपरा जिसे गांव वाले आज भी मानते आ रहे है. दरअसल भाड़ी गांव मे होली का त्यौहार एक दिन पहले मनाया जाता है. जिसके पिछे ग्रामीणों कि एक अजीब ही मान्यता है. ग्रामीणों का मानना है कि होली के त्यौहार को नियत तिथि में अगर मनाया जाता है तो गांव में आपसी लड़ाई-झगड़े, दुर्घटना और मौत जैसे मामले होने लगते है. जिस कारण वर्षो पहले पुर्वजो के द्वारा बनाया परंपरा को आज भी ग्रामिण कायम रखे हुए है.
एक ओर गांव के ग्रामिण अपने पुर्वजो के बनाए परंपरा को नहीं तोङ रहे. ऐसे मे गांव मे एक दिन पहले मनाए जाने वाले होली के त्यौहार को लेकर ग्रामिणो मे वही खुशी नजर आती है जो खुशी होली त्यौहार मनाते दुसरे लोगो मे होती है. लेकिन गांव मे एक दिन पहले होली मनाने के परंपरा के पीछे गांव के कुलदेवता के नाराज होना आज भी गांव के ग्रामिणो के जहन मे है. कारण यही है कि गांव के पुर्वजो ने जो परंपरा बनाई वो आज तक जारी है. ग्रामिणो का मानना है कि कुलदेवता को खुश रखने के लिए पुर्वजो ने जो परंपरा बनाई थी. उसे हम नहीं तोड़ सकते।
बहरहाल मान्यताए और परंपरा जो भी हो त्यौहार का खुशी किसी भी दिन हो, जरुरी तो बस आपसी भाईचारे कि है. जोकी भाड़ी गांव मे एक दिन पहले होली मनाते गांव वालो मे साफ नजर आती है.