
जशपुर । जिले के तुमला थाना क्षेत्र में 4 दिनों से लापता मयाराम यादव की लाश बुधवार को कुचमुंडा के जंगलों में पड़ी मिली। जंगली हाथी (Wild elephant) ने उसकी हत्या कर दी थी। जंगली हाथी (Wild elephant) के हमले से होने वाली मौत पर परिजनों को 25 हजार रुपए की तत्कालिक सहायता राशि (Relief amount) दी जाती है। गरीब ( poor.) मयाराम के परिजनों को वो भी मयस्सर नहीं हुई। कर्ज लेकर उसका अंतिम संस्कार(Funeral.) करना पड़ा। वन विभाग के अधिकारियों ने आने में इतनी देर कर दी कि वहां से लाश उठाने में ही 6 बज गए। किसी तरह लाश को गांव लाया गया। उसके बाद रात 9 बजे उसका अंतिम संस्कार किया गया।
परिजनों को लेना पड़ा कर्ज:
एक ओर घर के कमाने वाले की लाश पड़ी थी और मयाराम यादव के परिजन गांव में लोगों के पास कर्ज ढूंढने में लगे थे। किसी तरह से मिलाजुला कर पैसों का इंतजाम हुआ। तब कहीं जाकर मयाराम यादव की रात 9 बजे चिता जली। वहीं परिजनों का कहना है कि अगर वन विभाग के अधिकारी समय पर पैसे दे देते तो इनती परेशानी नहीं उठानी पड़ती।
दिखाई दे रही प्रशासनिक लापरवाही:
मयाराम यादव के प्रकरण में प्रशासनिक लापरवाही देखने को मिली। वन विभाग के अधिकारियों ने अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई। यदि वे अपनी ड्यूटी निभाते तो उस गरीब परिवार को कर्ज नहीं लेना पड़ता। तो वहीं संबंधित अधिकारी का कहना है कि वो शासकीय कार्य से जिले से बाहर गए हैं शुक्रवार को आते ही प्रकरण का भुगतान करेंगे। अब उनको कौन समझाए कि गरीबी शुक्रवार बुधवार नहीं समझती।