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सपा और बसपा सरकार ने लागू किया था कांवड़ रूट पर दुकानदारों की पहचान उजागर करने वाला नियम

योगी सरकार की आलोचना पर सरकार का खुलासा

लखनऊ: दुकानदारों की पहचान उजागर करनेवाले नेमप्लेट लगाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहचान उजागर करनेवाला नियम यूपी की पूर्ववर्ती सपा सरकार ने बनाई थी और सपा और बसपा सरकार में भी लागू था। राज्य सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि यह मामला नया नही है और सपा सरकार की बेवजह आलोचना की जा रही है।
सपा सरकार में 2006 में ही बना नियम
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि पहचान उजागर करने वाला नियम सपा सरकार के समय 2006 में ही बना था। गौरतलब हो कि
22 जुलाई से सावन महीना शुरू हो रहा है। योगी सरकार ने कांवड़ यात्रा रूट पर दुकानदारों और ढाबा मालिकों को अपने नेमप्लेट लगाने के आदेश दिए हैं। सरकार के इस फैसले पर राजनीति तेज हो गई है। विपक्ष योगी सरकार पर हमला बोल रहा है। इस बीच, यूपी सरकार की ओर से कहा गया है कि यह नियम 2006 में ही बनाया गया है, जिसको लागू किया गया है। सरकार ने कहा कि यह फैसला कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया है। सरकार केवल यह सुनिश्चित कर रही है कि कांवड़ यात्रा के दौरान कानून व्यवस्था बनी रहे। सरकार के एक प्रवक्ता ने दावा किया यह आदेश नया नहीं है, इसे पहली बार 2006 में समाजवादी पार्टी के शासन के दौरान बनाया गया था और 2011 में बहुजन समाज पार्टी के शासन के दौरान इसके नियम जारी किए गए थे।
उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के है चार रास्ते
कांवड़ यात्रा के चार मुख्य रास्ते हैं, जो उत्तराखंड के हरिद्वार से शुरू होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होकर गुजरते हैं। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक यात्रा रूट है, जोकि वाराणसी से शुरू होकर झारखंड के देवघर तक जाता है। एक अन्य कांवड़ यात्रा रूट है, जो बाराबंकी और गोंडा के बीच होता है। बाराबंकी में प्रसिद्ध महादेवा मंदिर है। यहां पर सावन महीने में बड़ी संख्या में कांवड़िए आते हैं। इसके अलावा छोटे स्तर पर प्रयागराज, भदोही, मिर्जापुर और गाजीपुर में भी कांवड़ यात्राएं निकाली जाती हैं।
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूराने आदेश को लागू किया गया’
योगी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार कांवड़ यात्रा के शांतिपूर्ण और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए केवल एक पुराने आदेश को लागू किया गया है। कांवड़िए शिव भक्त होते हैं और पवित्र अवधि के दौरान भोजन आदि के बारे में विशेष नियमों का पालन करते हैं। उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। वहीं, भाजपा के सहयोगी दल, अखिलेश यादव और मायावती सहित विपक्षी नेताओं ने आदेश को लेकर सरकार पर निशाना साधा और इस आदेश को दो समुदायों के बीच संघर्ष पैदा करने वाला बताया है।
एडीजी डीके ठाकुर ने की सरकार के दावे की पुष्टि
मेरठ जोन के एडीजी डीके ठाकुर ने इस दावे का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नियमों को 2023 में भी लागू किया गया था। यह नियम कोई नया नहीं है और हमने इसे पिछले साल भी लागू किया था। इस नियम को लेकर कुछ भ्रम फैलाया जा रहा है। मुजफ्फरनगर में एक-दो साल पहले कुछ कांवड़िए कांवड़ मार्ग पर एक ढाबे पर खाना खाने गए थे। बाहर हिंदू नाम था, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि मालिक और कर्मचारी दूसरे समुदाय के हैं। इससे कुछ कहासुनी हो गई थी। शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने यह फैसला लिया है। खासकर कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी तरह के भ्रम से बचने के लिए कांवड़ मार्ग पर स्थित भोजनालयों को मालिक और कर्मचारियों के नाम लिखने होंगे।

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