
रायपुर । छत्तीसगढ़ की संस्कृति पर संतों का गहरा प्रभाव है। हम संत कबीर (Sant Kabir,) गुरु बाबा घासीदास (Guru Baba Ghasidas) और बाबा साहेब (Baba Saheb Bhimrao Ambedkar) के बताए मार्ग पर चलकर ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे । ये बातें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel,) ने अमेरिका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) के भारत सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान कही। छत्तीसगढ़ की संस्कृति पर संतों प्रभाव को बताते हुए उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ में कई जातियों के लोग एक साथ रहते हैं। यहां जाति गौरव है। इन जातियों में वैमनस्यता कहीं दिखाई नहीं देगी।
जातियों से जुड़ी हैं हमारी परंपराएं:
भारत में जाति और राजनीति परंपरा दोनों बिंदुओं पर निर्धारित करती है। दूसरा सम्मान पूर्वक जीने का गौरव। वहीं राजनीति, आर्थिक सुरक्षा और सांस्कृति उत्थान निर्धारित भी करती है और प्रभावित भी करती है। उपनिवेश काल में ये जो व्यवस्था है उसे बहुत प्रभावित किया है। छत्तीसगढ़ एक उदारण है, जिसमें अनेक जातियां आकर वहां साथ-साथ रह रही हैं। छत्तीसगढ़ के विकास में ये सभी अपना योगदान दे रहे हैं। सभी उपार्जन में भागीदारी करते हैं।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने किया था एन्वाइट:
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जाति और राजनीति विषय पर अपना व्याख्यान दिया। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने भारत सम्मेलन में शामिल होने के लिए सीएम बघेल को न्यौता भेजा था।
मुख्यमंत्री भूपेश ने भारतीय प्रवासियों खासकर छत्तीसगढ़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि भूगोल किसी भी देश की अर्थव्यवस्था कहलाता है। भूगोल और अर्थव्यवस्था को मिलाकर ही राजनीति की जाती हैं। भूगोल, अर्थव्यवस्था, राजनीति मिलकर इतिहास बनाते है। इसी तरह भूगोल, अर्थव्यवस्था, राजनीति और इतिहास मिलकर उस देश के संस्कृति तय करते हैं। जाति और राजनीति को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए।
छत्तीसगढ़ की माटी पर संतों के प्रभाव को किया रेखांकित:
एक और बात जो हमारे संत, महापुरुष है, समाज सुधारक है, उनकी भूमिकाएं बहुत अधिक होती है। छ्तीसगढ़ में कबीर का प्रभाव, गुरुघासीदास, स्वामी आत्मानंद का प्रभाव है। गुरू घासीदासजी ने कहा कि मनखे-मनखे एक समान। किसी प्रकार का कोई भेद नहीं है। इसका प्रभाव छत्तीसगढ़ में देख सकते हैं। वहीं जाति गौरव है, लेकिन जातियों में वैमनस्यता कहीं दिखाई नहीं देगी। ये छत्तीसगढ़ की खासियत है। जातियों को जब तक राजनीति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाएगा। उसके जनसंख्या के आधार पर सुरक्षित नहीं किया जाएगा। तब तक हम उत्पादन का अधिकार एवं गौरव पूर्ण नागरिकता को सुरक्षित नहीं रख पाएंगे।
मनखे मनखे एक सामान को बताया आदर्श:
सीएम बघेल ने आगे कहा आगे कि इसलिए हम बाबा साहेब आंबेडकर के दिखाए रास्ते पर चलकर मजबूत राष्ट्र बना सकते हैं। जातियों के लिए सामाजिक, आर्थिक मजबूती के लिए मनख-मनखे एक सामान के आदर्श को बढ़ाना पड़ेगा। पुरात्व काल की घटनाएं स्मृतियों में सावधानी पूर्वक देखते हुए बाबा साहेब के बताए हुए मार्ग पर चलकर प्रज्ञा, करूणा और मैत्री के आधार पर सामाजिक सरोकार को बढ़ाना होगा। बिना किसी ऐतिहासिक प्रश्न से डरे बिना विश्व में भारत के गांव के स्वालंबन को गांधी के रास्ते पर चलते हुए प्रकृति और संस्कृति दोनों शामिल है। उसे हमको बढ़ावा देना होगा। उनको जगह देनी होगी, उनके जो खेल, गीत है। उसको सम्मान देना होगा। समृद्ध राष्ट्र, समृद्ध समाज और निर्भय नागरिक तभी बन सकते हैं ।