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RAIPUR NEWS: जब तक ये सरकार किसान विरोधी कानूनों को वापस नहीं लेती, किसानों का देशव्यापी आंदोलन जारी रहेगा

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए इस देश के 15 करोड़ लघु व सीमांत किसानों के लिए 90000 करोड़ रुपयों की आवश्यकता है, लेकिन मात्र 65000 करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए हैं। पांच करोड़ से ज्यादा अप्रवासी मजदूरों के अपने गांवों में वापस लौटने के बावजूद मनरेगा के मद में कोई वृद्धि नहीं की गई है। इससे रोजगार का संकट और गहरा होगा।

रायपुर। Raipur News: केंद्र सरकार के तीन कृषि कानून के खिलाफ राष्ट्रीय राजमार्ग मंदिर हसौद और बोरियाखुर्द के पास चक्का जाम कर दिया गया है। वाहनों का आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है। दूसरे राज्‍यों से पहुंचे वाहन भी जाम में फंसे हुए हैं। चालकों ने प्रदर्शनकारियों से रास्‍ते की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी आह्वान पर चक्‍का जाम किया गया है। किसानों ने कानून को वापस लेने और सी-2 लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही केंद्र सरकार के किसान विरोधी और कारपोरेटपरस्त बजट के खिलाफ पूरे प्रदेश में प्रदर्शन और चक्का जाम करके नारेबाजी की जा रही है।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में जन आंदोलन का इस तरह दमन सरकार के बर्बर और असभ्य होने की निशानी है। पूरी दुनिया भाजपा सरकार की इस असभ्यता को देख रही है और इसके खिलाफ सड़कों पर उतर रही है।

उन्होंने कहा कि किसानों की आय को दोगुना करने का वादा करने वाली सरकार ने हर साल की तरह इस वर्ष के बजट में भी कटौती कर दी है। कृषि क्षेत्र में किए गए वास्तविक खर्च की तुलना में आठ फीसद की और खाद्यान्न सब्सिडी में 41 फीसद की कटौती की गई है। इसके कारण किसानों को मंडियों और सरकारी सोसाइटियों की तथा गरीब नागरिकों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली की जो सुरक्षा प्राप्त है, वह कमजोर हो जाएगी।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए इस देश के 15 करोड़ लघु व सीमांत किसानों के लिए 90000 करोड़ रुपयों की आवश्यकता है, लेकिन मात्र 65000 करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए हैं। पांच करोड़ से ज्यादा अप्रवासी मजदूरों के अपने गांवों में वापस लौटने के बावजूद मनरेगा के मद में कोई वृद्धि नहीं की गई है। इससे रोजगार का संकट और गहरा होगा।

सार्वजनिक क्षेत्र की अप्रयुक्त जमीन को उसके मूल भूस्वामियों को लौटाए जाने की जरूरत है, लेकिन इसे कारपोरेट घरानों को सौंपने की योजना बनाई गई है। इससे किसानों की बेदखली और बढ़ेगी। इस बजट से मोदी सरकार का किसान विरोधी और आदिवासी विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है। किसान सभा के नेताओं ने कहा है कि इन गलत नीतियों के खिलाफ पूरे छत्तीसगढ़ में सड़कों को जाम कर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जब तक ये सरकार किसान विरोधी कानूनों को वापस नहीं लेती, किसानों का देशव्यापी आंदोलन जारी रहेगा। यह आंदोलन देश की समूची अर्थव्यवस्था के कारपोरेटीकरण के खिलाफ आम जनता का देशभक्तिपूर्ण आंदोलन है और इसका दमन करने, फूट डालने या इसे बदनाम करने की मोदी सरकार की साजिशें सफल नहीं होंगी।

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