
रायपुर। हर साल महिलाओं के उपर होने वाली हिंसा के खिलाफ 25 नवम्बर से 10 दिसंबर तक 16 दिवसीय कॅम्पेन आंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है। ये 16 दिवस कॅम्पेन की शुरुवात 1991 में Women Global Leadership Institute, Center for Women’s Global Leadership ने की थी। इसमें व्यक्ती और संस्था मिलकर महिलांओ पे हिंसा ना हो , हिंसा खतम हो जाये इसके लीये जन जागृती करते है। वहीं इस वर्ष महिला अध्ययन केन्द्र, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर और ऑक्सफैम इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में सशक्तिकरण नहीं उम्र, बनो नई सोच, बुनो हिंसा मुक्त रिश्तें विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में 9 दिसंबर 2021 को किया गया है।
प्रो. रीता वेणुगोपाल, निदेशक और प्रो. प्रियंवदा श्रीवास्तव, सह-निदेशक, महिला अध्ययन केंद्र ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पंडित रविशंकर शुक्ला विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति प्रो. के .एल. वर्मा थे।
अध्यक्ष ने अपने अध्यक्षीय भाषण में सबसे पहले आयोजकों को इस तरह के सुंदर आयोजन के लिए बधाई दी है और सम्मेलन के विषय की सराहना की और इस तथ्य पर प्रकाश डाला है कि समाज में जागरूकता लाने के लिए सबसे पहले हमें आपस में जागरूकता लानी होगी। उन्होंने इंगित किया कि पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता लाने के लिए हमें समाज की कुरीतियों जैसे बाल विवाह, छेड़खानी आदि के खिलाफ लड़ना होगा।
सम्मेलन की मुख्य वक्ता आई .पी .एस हिमानी खन्ना, डी .आई .जी, सी .आई.डी रायपुर ने कहा कि केवल कानून बनाना ही काफी नहीं है, हमें अपनी सोच बदलनी होगी। उन्होंने हिंसा मुक्त समाज की स्थापना पर जोर दिया। विशिष्ट अतिथि आईपीएस मेलिना कुर्रे ए.आई.जी, सी.आई.डी ने अपने भाषण में इस बात पर जोर दिया कि एक महिला का निर्णय पूरी तरह से उसका अपना निर्णय होना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने आग्रह किया कि हमारी चिंताओं को हमारी बेटियों और बहनों के लिए बाधा नहीं बनना चाहिए।
सम्मेलन की प्रथम वक्ता डॉ. नेहा ठाकुर ने सामाजिक और जैविक दृष्टिकोण से महिलाओं की उम्र के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने परिवार में कम उम्र में विवाह की श्रृंखला को तोड़ने की सलाह दी ताकि एनीमिया और किशोर गर्भधारण की समस्या को रोका जा सके। परिवार उच्च न्यायालय की काउंसलर ज्योति शर्मा ने अपने व्याख्यान में बाल विवाह और उससे जुड़े कानूनों के बारे में चर्चा की।
ऑक्सफैम इंडिया के आनंद शुक्ला ने सम्मेलन के विषय पर और लैंगिक संवेदनशीलता पर ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने के बारे में भी अवधारणा दी। इसके अलावा महिला सशक्तिकरण पर पंडवानी, बाल विवाह पर स्किट जैसी विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां पांडवानी कलाकारों और सामाजिक कार्य और समाजशास्त्र विभाग पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के छात्रों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ अनुराधा चक्रवर्ती और धन्यवाद ज्ञापन प्रगति कृष्णन, महिला अध्ययन केंद्र, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा किया गया।