हाथरस कांड के पीड़ित परिवार की शिफ्टिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस भेज मांगा जवाब

उत्तर प्रदेश। हाथरस में 2020 में गैंगरेप मामले के पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दाखिल कर गुहार लगाई कि परिवार को यूपी से बाहर दिल्ली या दूसरे राज्य में शिफ्ट करने की व्यवस्था की जाए। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस की अगुआई वाली पीठ ने पीड़ित परिवार की अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए यूपी सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है।
पीड़ित परिवार के वकील ने कहा कि मामले से जुड़े सभी आरोपियों को 2 मार्च को बरी कर दिया गया था। उसके बाद से ही उनके परिवार पर लगातार प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से खतरा मंडरा रहा है।
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने तब हैरानी जताई जब इलाहाबाद हाईकोर्ट का जुलाई 2022 का आदेश और उत्तर प्रदेश सरकार की अपील देखी। आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीड़ित परिवार के सदस्य को नौकरी और पीड़ित परिवार को यूपी से बाहर शिफ्ट करने का आदेश दिया था। लेकिन यूपी सरकार और प्रशासन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया।
यूपी की अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने पीठ को बताया कि राज्य सरकार परिवार को स्थानांतरित करने के लिए तैयार है। लेकिन वे नोएडा, गाजियाबाद या दिल्ली में रहना चाहते हैं। साथ ही प्रभावित पीड़ित आश्रितों की सूची में मृतक पीड़िता का बड़ा भाई भी है जो शादीशुदा है। एएजी ने सवाल उठाया कि क्या बड़े विवाहित भाई को पीड़िता का “आश्रित” माना जा सकता है? ये कानून का सवाल है। इस पर पीठ ने कहा कि वह मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए इसमें हस्तक्षेप करने की इच्छुक नहीं है।