श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में सुनवाई पूरी, हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

उत्तरप्रदेश। श्री कृष्ण जन्मस्थान शाही ईदगाह मामले में गुरुवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित किया है। हिंदू पक्ष ने सुनवाई के दौरान कोर्ट कमीशन बनाने और शाही ईदगाह के ASI सर्वे कराने की मांग रखी। अब हिंदू पक्ष की एडवोकेट कमीशन पर फैसले के बाद कोर्ट याचिकाओं पर कोर्ट सुनवाई करेगा।
श्री कृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ भूमि मुक्त कराने की मांग को लेकर दाखिल 16 वाद पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने श्रीकृष्ण विराजमान की दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए मथुरा कोर्ट में चल रहे वादों को ट्रांसफर कर लिया था।
सितंबर 2020 में भगवान श्री कृष्ण की सखी के रूप में सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने मथुरा की लोअर कोर्ट में वाद दाखिल किया था। इसके बाद श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास, श्री कृष्ण जन्मभूमि न्यास,अखिल भारत हिंदू महासभा के अलावा पवन शास्त्री,अनिल त्रिपाठी,जितेंद्र विशेन सहित 13 से ज्यादा लोगों ने मथुरा की सिविल कोर्ट में श्री कृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ भूमि मुक्त कराने की मांग को लेकर वाद दाखिल किए गए हैं।
श्री कृष्ण जन्मस्थान शाही ईदगाह मामले में 2.37 एकड़ भूमि को लेकर है। श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर और उससे जुड़े परिसर की भूमि करीब 11 एकड़ है। जबकि 2.37 एकड़ श्री कृष्ण जन्मस्थान से सटी भूमि पर शाही ईदगाह बनी हुई है। श्री कृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट का दावा है कि पूरी भूमि आज भी दस्तावेजों में उनके नाम है। वहां का टैक्स भी नगर निगम में वह जमा कराते हैं। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि 1968 में श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ द्वारा एक समझौता किया गया था। जिसमें मस्जिद की भूमि उनके नाम की गई थी।