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बड़ी खबर: दीपावली के पहले छत्तीसगढ़ के किसानों, ग्रामीण भूमिहीन मजदूरों और गोबर विक्रेताओं के खाते में आएगी लगभग 1800 करोड़ रूपए की राशि

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में 8 करोड़ 13 लाख रूपए की राशि का ऑनलाईन अंतरण करते हुए यह जानकारी दी। इस राशि में से गोबर विक्रेता पशुपालकों, ग्रामीणों को 5.34 करोड़ रुपए की राशि, गौठान समितियों को 1.69 करोड़ और महिला स्व सहायता समूहों को 1.11 करोड़ रूपए की लाभांश राशि वितरित की गई। गोबर विक्रेताओं को आज भुगतान की गई राशि को मिलाकर गोबर खरीदी के एवज में अब तक 170.34 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है।

इस अवसर पर गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. अय्याज एफ. तम्बोली, मिशन संचालक राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अवनीश शरण, संचालक पशुधन चंदन संजय त्रिपाठी, कृषि विभाग के उप सचिव तूलिका प्रजापति भी उपस्थित थीं।

किसानों से पैरादान की अपील
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम में किसानों से पैरादान की अपील करते हुए कहा कि धान की कटाई शुरू होने वाली है। किसान पैरा न जलाएं, गौठानों में मवेशियों के चारे के लिए पैरादान करें। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था होने से वे खेत में नही जाएंगे। इससे खरीफ फसल के साथ-साथ उन्हारी फसल भी बचेगी। मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के अधिकारियों से उन्हारी फसलों, सरसों, तिवरा, अलसी आदि के बीज की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी 1 नवम्बर से शुरू की जाएगी। अधिकारियों को बारदाने सहित धान खरीदी केंद्रों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दे दिए गए हैं, जिससे किसानों को धान बेचने में असुविधा न हो।

ग्राम पंचायतों के आश्रित गांवों में गौठान शुरू करने तैयार करें कार्ययोजना
सीएम बघेल ने कहा कि प्रदेश में अब तक 10 हजार 624 गौठानों की स्वीकृति दी गई है, जिसमें से 8408 गौठान निर्मित हो चुके हैं। अब ग्राम पंचायतों के बाद उनके आश्रित गांवों में गौठान की मांग आ रही है। इन गांवों में गौठान प्रारंभ करने की कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब गांवों में पहले पहल गांवों में गौठान बने तो महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं में गौठान से जुड़कर वहां आजीविका मूलक गतिविधियां चलाने के लिए होड मच गई। महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट के साथ सब्जी उत्पादन, मुर्गी पालन, मछली पालन, मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियों से जुड़ी। अब विगत 2 अक्टूबर को 300 रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क के शुभारंभ के बाद अनेक गांवों से रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क प्रारंभ करने की मांग आ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे गांवों में रीपा शुरू करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। हमें युवाओं को भी गौठानों से जोड़ना होगा। गौठानों में इन पार्को में वर्किंग शेड, पहुँच मार्ग निर्माण और बिजली, पानी की व्यवस्था के लिए प्रति गौठान दो-दो करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। गौठानों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने से यहां ग्रामीण युवाओं को अपने उद्यम शुरू करने में आसानी होगी।

कृषि उपज मण्डी की जमीन पर रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क शुरू करने कार्ययोजना बनाएं
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कृषि मंत्री द्वारा कृषि उपज मण्डी की खाली पड़ी जमीन में रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क प्रारंभ करने के सुझाव का स्वागत करते हुए कहा कि मंडियों में शेड और चबूतरे बने हैं, लेकिन इनका उपयोग नही हो पा रहा है। यहां रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क शुरू किए जा सकते हैं। इसी प्रकार शहरी क्षेत्रों में भी यदि अर्बन इंडस्ट्रीयल पार्क प्रारंभ किए जाएं और इससे युवाओं को जोड़ा जाए तो बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। मुख्यमंत्री ने मण्डी की खाली जमीन पर कृषि सेवा केन्द्र प्रारंभ करने गौठानों में विभिन्न आय मूलक गतिविधियों के लिए महिलाओं और युवाओं की ट्रेनिंग शुरू करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठानों में अब तक 53 हजार 231 लीटर गौ मूत्र का क्रय किया गया है, जिससे तैयार कीट नियंत्रक ब्रम्हास्त्र और वृद्धिवर्धक जीवामृत की बिक्री से महिला समूहों को 10.05 लाख रूपए की आय हुई है।

कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने इस अवसर पर कहा कि गांवों के गौठान, गोधन न्याय योजना और रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क आने वाले समय में हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मूलभूत आधार बनेंगे। मंत्री चौबे ने कहा कि राज्य शासन की योजनाओं से छत्तीसगढ़ आज देश में सबसे कम बेरोजगारी दर वाला राज्य है। रविंद्र चौबे ने गोधन न्याय योजना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस योजना के तहत अब तक 170 करोड़ के गोबर की खरीदी की जा चुकी है। इस योजना में गौठान समितियों और महिला स्व सहायता समूहों को 162 करोड़ 21 लाख रूपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है। इसके साथ-साथ गौठानों में विभिन्न गतिविधियों में संलग्न 11 हजार 187 महिला स्व सहायता समूह की 83 हजार 874 महिलाओं को वर्मी कम्पोस्ट सहित विभिन्न आय मूलक कार्यो से 81 करोड़ 84 लाख रूपए की आमदनी हुई है। मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया।

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